हम उनको हमेशा हँसाते रहे,
वो हमको हमेशा रुलाते रहे।
वो हमसे सदा कुछ छुपाया किये,
हम अपनी मुहब्बत दिखाते रहे॥
कभी अश्कों को हमनें लगाया गले,
कभी दर्द सीने में दबाते रहे।
वो मेरे लिये दुख उठा ना सके,
हम उनके लिये मुस्कुराते रहे॥
कभी दर्द सीने में दबाते रहे।
वो मेरे लिये दुख उठा ना सके,
हम उनके लिये मुस्कुराते रहे॥
जाने क्या हमसे खता हो गयी,
दामन वो अपना चुराते रहे।
हमने कोशिश तो की करीब आने की,
मगर वो दूरियाँ बढाते रहे॥
मिले खुशियाँ तुम्हें ज़िन्दगी में सभी,
रब से ये ही हम मनाते रहे।
वो प्यार की कसमें निभा ना सके,
हम सपनों की दुनियाँ सजाते रहे॥
ना परवाह की ज़माने की हमने,
साथ उनका हमेशा निभाते रहे।
वो मुझसे कभी दिल लगा ना सके,
हम उनके लिये जाँ लुटाते रहे॥
ठोकर लगी जब भी राहों में उनको,
ज़ख्म-ए-मर्हम उन्हें हम लगाते रहे।
कभी आहों को मेरी वो सुन ना सके,
और हम अपना जनाज़ा उठाते रहे॥
ये कहानी है एक ऎसे इंसान की जो वफ़ा तो करता रहा, पर कभी बदले में वफ़ा पा ना सका।
और आज ये हाल है कि, उसके लिये मरना आसान है और जीना बहुत मुश्किल...........

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