Wednesday, March 17, 2010

इन्तज़ार

कर रहें हैं इन्तज़ार तेरा, पलकों को बिछाकर,
आये नहीं तुम यार मेरे, ख्वाबों में आकर।
मर ना जाऊँ कहीं मैं, तेरा यूँ इन्तज़ार कर के,
कि दर्द ले लिया है सनम, तुमसे प्यार कर के॥

1 comment:

  1. जिंदा हम हैं, ख्वाब नहीं
    इंतज़ार है, लेकिन तुम नहीं
    प्यार तुमसे किया है और मौत है हमारी दीवानी
    आजाओ, के न जाने कब मिलन हो ||

    बहुत खूब लिखते हो जनाब!

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