Tuesday, July 19, 2011

I am back again......With

प्यार करके भी ना वो प्यार की सौगात दे सके
मॅागा था उनका साथ; ना वो साथ दे सके।
छोड कर चल दिये मुझको वो घर बसाने गैर का
हॅाथो में ना मेरे वो अपना हाथ दे सके॥

Friday, June 4, 2010

ये सदा है मेरे दिल की

ये सदा है मेरे दिल की, ये एहसास है,

तू नही तो ज़िन्दगी में, ना कुछ खास है।

माँगता हूँ दुवाएं, बस खुदा मेरे,

हर खुशी है ज़िन्दगी में, जो तू पास है॥

हर घडी हर पहर, तेरा सज़दा किया,

अपने हर एक ख्यालों में, देखा किया।

आ भी जाओ मेरी, ज़िन्दगी में सनम,

माँगता दिल मेरा, तुमसे सौगात है॥

ना दवा के लिए, ना खुदा के लिए,

दिल तड़पता है मेरा, वफ़ा के लिए।

चोट दिल पे जो मेरे, लगा जाओगे,

मौत का मुझको दामन, थमा जाओगे।

आखिरी ये मेरे, तुमसे अल्फ़ाज़ है,

तू नही तो ज़िन्दगी में, नहीं साँस है॥

Saturday, April 3, 2010

नवेद-ए-अजल

उम्मीद -ए- चिराग में, हम चलते चले गए,
आई नज़र जो रोशनी, मुझे मंज़िल थी मिल गई।
आया जो एक तूफ़ान, दिया बुझ सा गया,
और मंज़िल ही, मेरी मौत का सामान बन गई॥

Sunday, March 21, 2010

दुआ करता हूँ

आँसू ना आँखों में आए तेरे,
ये दुआ करता हूँ मैं,
मुझे सारे ग़म मिल जाए तेरे,
ये दुआ करता हूँ मैं।

पूरे हों सब ख्वाब तेरे,
ये दुआ करता हूँ मैं,
हर वक्त गुजरे साथ तेरे,
ये दुआ करता हूँ मैं।

मेरी ज़िन्दगी हो नाम तेरे,
ये दुआ करता हूँ मैं,
मेरी मौत आए काम तेरे,
ये दुआ करता हूँ मैं॥

Friday, March 19, 2010

हम अपना जनाज़ा उठाते रहे

हम उनको हमेशा हँसाते रहे,
वो हमको हमेशा रुलाते रहे।
वो हमसे सदा कुछ छुपाया किये,
हम अपनी मुहब्बत दिखाते रहे॥

कभी अश्कों को हमनें लगाया गले,
कभी दर्द सीने में दबाते रहे।
वो मेरे लिये दुख उठा ना सके,
हम उनके लिये मुस्कुराते रहे॥

जाने क्या हमसे खता हो गयी,
दामन वो अपना चुराते रहे।
हमने कोशिश तो की करीब आने की,
मगर वो दूरियाँ बढाते रहे॥

मिले खुशियाँ तुम्हें ज़िन्दगी में सभी,
रब से ये ही हम मनाते रहे।
वो प्यार की कसमें निभा ना सके,
हम सपनों की दुनियाँ सजाते रहे॥

ना परवाह की ज़माने की हमने,
साथ उनका हमेशा निभाते रहे।
वो मुझसे कभी दिल लगा ना सके,
हम उनके लिये जाँ लुटाते रहे॥

ठोकर लगी जब भी राहों में उनको,
ज़ख्म-ए-मर्हम उन्हें हम लगाते रहे।
कभी आहों को मेरी वो सुन ना सके,
और हम अपना जनाज़ा उठाते रहे॥

ये कहानी है एक ऎसे इंसान की जो वफ़ा तो करता रहा, पर कभी बदले में वफ़ा पा ना सका।
और आज ये हाल है कि, उसके लिये मरना आसान है और जीना बहुत मुश्किल...........

Wednesday, March 17, 2010

इन्तज़ार

कर रहें हैं इन्तज़ार तेरा, पलकों को बिछाकर,
आये नहीं तुम यार मेरे, ख्वाबों में आकर।
मर ना जाऊँ कहीं मैं, तेरा यूँ इन्तज़ार कर के,
कि दर्द ले लिया है सनम, तुमसे प्यार कर के॥